गोंद व दवा बनाने के लिए होता है उपयोग
कृषि विज्ञान केंद्र जांजगीर के जिला समन्वयक डॉ. विजय जैन ने बताया कि चरौटा को अंग्रेजी में फोएस्टिस केसिया कहते हैं। चरौटा के बीज का मल्टीपरपज यूज होने लगा है। मेडिसिन, हर्बल,आयुर्वेद की दवा बनाने में उपयोग हो रहा है। इसका बीज चर्मरोग, फंगस, बीमारी नाशक दवा, बातरोग की दवा बनाने के काम में आता है। इसके अलावा स्किन संबंधी मेडिसिन और काफी के विकल्प के रूप में भी इसका इस्तेमाल होने लगा है। ग्लू इंडस्ट्रीज में गोंद बनाने एवं पशुचारा बनाने इसका उपयोग हो रहा है। सौंदर्य प्रसाधन एवं साबुन बनाने में भी चरौटा बीज का इस्तेमाल होता है।
एशियाई देशों से बढ़ी मांग छग में भी रिसर्च
डॉ. जैन ने बताया कि पिछले तीन-चार सालों से चरौंटा के बीज की मांग एशियाई देशों से हो रही है और संग्राहकों को इसका बेहतर मूल्य भी मिल रहा है, जिसने इसके व्यवसायिक उत्पादन की संभावनाएं बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय रायपुर में इस पर रिसर्च चल रहा है। छग के प्रमुख वैज्ञानिक इस पर लगे हुए हैं।
लघु वनोपज घोषित कर की जाए खरीदी
किसानों का कहना है कि शासन को चाहिए कि चरौटा बीज की उपयोगिता के आधार पर इसका मूल्यांकन करे और यदि चरौटा बीज में संभावनाएं दिखें तो इसे बतौर लघु वनोपज घोषित कर अपने अधीन इसकी खरीदी करवाए ताकि संग्राहकों को इसका उचित मूल्य मिल सके। साथ ही चरोटा के लिए अनुकूल क्षेत्रीय जलवायु को देखते हुए इसके उत्पादन के प्रयास भी किया जा सकता है।
हो रही अच्छी कमाई
जिले के बलौदा, अकलतरा, पामगढ़, नवागढ़, सक्ती, डभरा, जैजैपुर, मालखरौदा ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्र के लोग इन दिनों चरौटा की कटाई में व्यस्त हैं। कोचिये गांव-गांव में घूम-घूमकर 50-60 रुपए किलो में बीज खरीद रहे हैं। ग्रामीण रामबाई यादव, सोनूराम बताते हैं कि चरौटा के बीज से अच्छी कमाई हो रही है। रामाधार देवांगन का कहना है कि वह चरौटा का बीज बेचकर 5 हजार की आमदनी कमा चुका है।
Wednesday, 31 July 2019
चरौटा भाजी
चरौटा भाजी
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